सनातन भारत – विश्व की जरूरत

परिचय

विश्व की स्थिति को हम सभी लोग देख और जान रहे है। सच्चाई से भी अवगत है, लेकिन मानना नहीं चाहते। विश्व आज एक अंधी दौड़ में भाग रहा है जिसका अंत सिर्फ विनाश है। यह लोग देख भी रहे है और जान भी रहे है, लेकिन अपनी इच्छा पूर्ति में दुसरो को भी अपनी अंधी दौड़ में शामिल किए हुए है। अहंकार से भरे लोग और देश पूरी दुनिया को अंधकार में धकेल चुके है और अपनी स्वार्थपूर्णता के लिए लगातार उसी रास्ते पे लोगों को जाने के लिये मजबूर कर रहे है। 

इतिहास 

इतिहास गवाह है, पूरे विश्व को शांति, ज्ञान, जीवन सिर्फ सनातन से ही मिला है, और सिर्फ सनातन से ही मिलेगा आगे भी। सनातन को आज या कल आपको अपनाना ही पड़ेगा, हर स्तिथि में, क्योकि समय की जरूरत को सिर्फ सनातन ही भर सकता है। विश्व की बड़ी से बड़ी लड़ाइयां और परेशानिया सिर्फ सनातन के माध्यम से दूर की जा सकी है। सिर्फ दो हज़ार साल से कुछ नए धर्म आये और जीवन जीने की कला ना जानना उनके लिए सबसे बड़ा दुष्प्रभाव बना जो वो सबके सिर पे मढ़ते चले जा रहे 

प्रकृतिके सिद्धांत में सबकुछ बना और लिखा हुआ है, मनुष्य उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता, अपनी इस कमजोरी को ना साबित हो, इसके लिए वो लगातार गलत किये जा रहा है। आज दुनिया मे सबसे ज्यादा ध्यान सिर्फ पेट भरना और भय लड़ाई पे खर्च किया जा रहा। किसी भी कीमत पे, बिना ज्ञान के, लोग मुर्गी, मछली, मिट, मगरमच्छ, मोर, चिड़िया, फतिंगे, जानवर को खाने की चीज़ें मान लिए है और लगातार क्रूरता का हिस्सा बनते चले जा रहे है। 

सनातन की शिक्षाएं 

सनातन की शिक्षाएं बहुत ही अदभुत है और जीवन के हर क्षेत्र में अपनाने के लिए है। 

इस बात को मनुष्य भूलते जा रहा है, जो जीवन मनुष्य के अंदर है वही सभी जीवों में भी है। वो तड़प उनमे भी वही है जो मनुष्य में है। मनुष्य को एक छोटी सी चोट लगने पे चिल्ला उठता है, वही किसी जानवर पक्षी फतिंगे को तड़पा के मार के खा रहा है। 

राजा भूल गया, राजा सिर्फ मनुष्य का नहीं सभी जीवों का है, जो उसके देश में रहते है। 

लोग लगातार अपनी जरूरतों के लिए प्रकृति का दोहन कर रहे है, पेड़ो को काटते है, लेकिन पेड़ लगाते नहीं है। एक पेड़ अपना पूरा जीवन मनुष्यों और जीवो को दान कर देता है, जीते जी भी और मरने के बाद भी, पेड़ के सूख जाने के बाद उसके फर्नीचर बन जाते है, जो हमारी कई पीढियां प्रयोग करती है। 

परिणाम

जब जब क्रूरता की जाएगी, प्रकृति बदला लेगी, यह बात लोगो को अपने अहंकार में समझ नहीं आ रहा। दुनिया की सारी आपदाओं को देख लीजिए और उसकी जड़ में देखिये। 

नरसंहार, मनुष्यों पे क्रूरता, पशुओं की बलि, पशुओं पे क्रूरता, प्रकृति का हनन, ये मनुष्य जितना बढ़ायेगा, प्रकृति तब बदला लेगी। इस बात को आप एनर्जी बैलेंस के माध्यम से जान सकते है। 

आप को ये बात जानकर हैरानी होगी जहाँ जहाँ या छोटे स्तर पे देखिये जिस घर में लड़ाई झगड़े, क्रूरता, मांसाहार, शराब, ड्रग्स का सेवन होता है, वो घर नष्ट हो जाता है। 

ठीक इसी तरह जिस स्थान पे, बड़े पैमाने पे नरसंहार या पशु संहार होगा, वो जगह नष्ट हो जाएगा, ये प्रकृति का न्याय है, और इसको दुनिया की कोई भी ताक़त रोक नहीं सकती है। प्राकृतिक आपदाएं सदैव वहीं सबसे ज्यादा होती है, जहाँ पाप सबसे अधिक होता है। 

भविष्य

हमारा भविष्य हमारे आज पे निर्भर करता है, और हमारे कर्मो पे। हमने क्या किया, अपनी पीढ़ी के लिए, पर्यावरण के लिए और भविष्य के लिए। किस तरह के लोगो का निर्माण किया गया है, कैसी पीढ़ी बुनी गई है। 

पीढ़ी 

मनुष्य को अपनी पीढ़ी और पृथ्वी को आगे बढ़ाना है तो सिर्फ सनातन ही एक माध्यम है।

बच्चों को गायत्री मंत्र, बहुत छोटे से कराइये, उनमे सत्प्रवित्ति जन्म लेगी, जो उनका भविष्य और देश का भविष्य बनाती है। 

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