नौरात्रि, शक्ति की पूजा जरूरी क्यो ?

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। 
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।। 
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। 
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।। 
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
नौरात्रि, शक्ति की पूजा जरूरी क्यों? 

शक्ति को सनातन परंपरा में ब्रह्मांड की सृष्टि पालन और संहार की मूल ऊर्जा माना जाता है, जो नारी तत्व से जुड़ा है। शक्ति का प्रतीक दिव्य नारीत्व है, जो मातृत्व में रूप में प्रकट होता है।

1. नारी शक्ति का प्रतीक हैं।
2. नारी जननी है, इसलिए माँ शक्ति को जगतजननी भी कहा जाता है।
3. समाज मे नारियों की महत्ता, बहुत महत्वपूर्ण है।
4. एक अच्छी स्त्री ही एक अच्छा घर, समाज, देश, विश्व का निर्माण कर सकती है, इसलिए नारियों का अच्छा होना बहुत आवश्यक है।
5. सिर्फ अच्छी नारियां ही अच्छे पुत्र को जन्म दे सकती हैं।
आदि।

नौरात्रि की सीख।

1. नौरात्रि से समाज को मातृत्व और सम्मान का भाव कैसे रखना चाहिये, ये सीखने को मिलता है।
2. हमेशा अच्छी स्त्रीयों का सम्मान करें।
3. सदैव स्त्रियों की रक्षा के लिये तत्पर रहे, भले ही एक अच्छी स्त्री को बचाने में प्राण निछावर करने पड़े।
4. अच्छी स्त्रियां पुत्र, समाज का निमार्ण करती हैं।
5. पुत्रों को निर्माण सिर्फ स्त्रियां ही कर सकती है। 
आदि।

शारदीय नौरात्रि क्यों मनाते हैं?

शारदीय नौरात्रि शक्ति का विजय पर्व है, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया नौ दिन के युद्ध के बाद। बुराई पे अच्छाई की जीत।

देवताओं ने नौ देवियों की शक्ति से महिषासुर के वध की रूप रेखा बनाई और माता से आग्रह किया महिषासुर का नाश करें। 

भगवान रामजी ने रावण को मारने के लिए 9 दिन का शक्ति अनुष्ठान रखा और रावण का सर्वनाश किया, अधर्म पे धर्म की विजय।

स्वास्थ्य, शुख, समृद्धि का यह पर्व नौरात्रि, भक्ति, शक्ति, ज्ञान प्रदान करता है। 

नौदुर्गा 

1. माँ शैलपुत्री
2. माँ ब्रह्मचारिणी
3. माँ चंद्रघंटा
4. माँ कुष्मांडा
5. माँ स्कंदमाता
6. माँ कात्यायनी
7. माँ कालरात्रि
8. माँ महागौरी
9. माँ सिद्धिदात्री

नौ दुर्गा के बिज मंत्र।

1. माँ शैलपुत्री : ॐ ह्रीं शिवायै नम:।।
2. माँ ब्रह्मचारिणी : ॐ ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नम: ।।
3. माँ चंद्रघंटा : ॐ  ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।।
4. माँ कुष्मांडा : ॐ ऐं ह्रीं देव्यै नम: ।।
5. माँ स्कंदमाता : ॐ ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।।
6. माँ कात्यायनी : ॐ क्लीं श्रीं त्रिनेत्रायै नम: ।।
7. माँ कालरात्रि : ॐ क्लीं ऐं श्रीं कालिकायै नम: ।।
8. माँ महागौरी : ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं वरदायै नम: ।।
9. माँ सिद्धिदात्री : ॐ ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: ।।

माँ दुर्गा मंत्र और विवरण।

1. माँ शैलपुत्री

हिमालय की पुत्री, जो नवदुर्गाओं में प्रथम हैं। 

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

2. माँ ब्रह्मचारिणी

देवी का यह रूप ज्ञान और तपस्या से जुड़ा है।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

3. माँ चंद्रघंटा

ये देवी अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचंद्र धारण करती हैं, जो शक्ति और शांति का प्रतीक है।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

4. माँ कुष्मांडा

इन्हें ब्रह्मांड की रचयिता माना जाता है और ये आठ भुजाओं वाली हैं।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। 
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

5. माँ स्कंदमाता

यह माता अपने पुत्र स्कंद (भगवान कार्तिकेय) के साथ कमल पर विराजमान हैं।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

Siṃhasanagatā nityaṃ padmāśritakaradvayā |
Śubhadāstu sadā devī skandamātā yaśasvinī ||

6. माँ कात्यायनी

देवी का यह रूप योद्धा अवस्था में दिखाया गया है, और सिंह पर सवार होती हैं।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु कात्यायनी रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

7. माँ कालरात्रि

इनका रूप अत्यंत भयानक है, और इन्हें विनाश की देवी भी कहा जाता है।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
एकवेणी जपकर्णपुरा नग्न कालरात्री भीषणा|
दंष्ट्रकराल्वदनं घोरं मुक्तकेश्वरम्||
ललजतक्षं लंबोष्टिं शतकर्णं तथैव च|
वामपादोल्लासोल्लोह लतकन्तकभूशणम्||

8. माँ महागौरी

यह देवी माँ का सबसे सुंदर और शांत रूप है, जो समृद्धि और शांति प्रदान करती हैं।

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु महागौरी रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

Shvete Vrishesamarudha Shwetambaradhara Shuchih।
Mahagauri Shubham Dadyanmahadeva Pramodada॥

9. माँ सिद्धिदात्री

यह नौवीं देवी हैं जो सभी प्रकार की सिद्धियाँ और मोक्ष प्रदान करती हैं। 

मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु सिध्दिदात्री रूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

Siddha Gandharva Yakshadyairasurairamarairapi।
Sevyamana Sada Bhuyat Siddhida Siddhidayini॥

पशु बलि पाप है, इसका भुगतान आपको ही करना पड़ेगा।

पशु बलि निषेध है, देवी कभी भी किसी की हत्या से खुश नहीं होती है, ना ही ये हमारे किन्ही शास्त्रों में वर्णित किया गया है, लोगो ने अपने स्वाद के लिये और मुगलों के भारत मे आने के कुछ सालों के बाद से इसको बढ़ावा दिया और इस बहाने मांसाहार करने लगे। देवी का पशु बलि से कोई लेना देना नहीं है। बल्कि इससे मनुष्य एक हत्या और पाप जैसा घृणित कार्य करता है, जिसकी परिणाम उसको खुद भुगतना पड़ता है। 

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