सनातनी त्योहार मनाने क्यों जरूरी है?

हमारे त्योहार पूर्ण रूप से वैज्ञानिक है, जिसको आज के वैज्ञानिक आज खोज रहे है, लाखो वर्ष पूर्व हमारे ऋषि उनको लिख चुके है, समझा चुके है। और हम उस जीवन को जी रहे है, तभी विश्व का कल्याण हो रहा है। 

आज आप देखेंगे लोग सनातन की तरफ देख रहे है जीवन के हर उद्देश्य के लिए। जीवन जीने की कला सिख रहे सनातन से। 

हम सभी लोग देख रहे है, हमारी नई पीढ़ी को सनातन का ज्ञान नहीं के बराबर रह गया है। ये एक सोची समझी साजिश का विकराल स्वरूप है। किसी भी देश को अगर बर्बाद करना है तो वहाँ की संस्कृति और ज्ञान को खत्म कर दो, देश अपने आप गुलाम और बर्बाद हो जाएगा। 

इसलिए सभी लोग अपने घरों में ज्यादा से ज़्यादा अपनी संस्कृति से जुड़ीं, संस्कारों से जुड़े त्योहार मनाये।

हमारा दिन, महीने, वर्ष पूर्ण वैज्ञानिक और खगोलीय गड़ना पे आधारित है। इसको पूरे वैज्ञानिक तरीक़े से आपको बताते है। 

सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार।

सप्ताह के दिनों के नाम नक्षत्रों के आधार पर, जो प्राचीन ज्योतिषीय मिज़ाज से प्रेरित होते हैं। प्रत्येक दिन एक विशेष ग्रह को समर्पित है, और यह क्रम सूर्योदय से सूर्यादय तक के समय को 60 भागों में विभाजित करके निर्धारित किया गया था।

  • रविवार: सूर्य के नाम पर, जिसे आदित्य, अर्क, या भानु भी कहा जाता है।
  • सोमवार: चंद्र के नाम पर।
  • मंगलवार: मंगल ग्रह के नाम पर।
  • बुधवार: बुध ग्रह के नाम पर।
  • गुरुवार: बृहस्पति ग्रह के नाम पर।
  • शुक्रवार: शुक्र ग्रह के नाम पर।
  • शनिवार: शनि ग्रह के नाम पर।

यह क्रम प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में निर्धारित किया गया था, जहां ग्रहों को पृथ्वी से उनकी दूरी के अनुसार क्रमबद्ध किया गया था।

उदाहरण:

  • सूर्य को सबसे शक्तिशाली ग्रह माना जाता था, इसलिए रविवार सप्ताह का पहला दिन था।
  • चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब माना जाता था, इसलिए सोमवार दूसरा दिन था।
  • शनि सबसे दूर माना जाता था, इसलिए शनिवार अंतिम दिन था।

चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। 

हिंदी महीनों के नाम, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसके आधार पर रखे गए हैं। हर महीने का नाम, उस नक्षत्र के नाम पर रखा जाता है।

1. चैत्र:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम चैत्र रखा गया है।

2. वैशाख:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम वैशाख रखा गया है।

3. ज्येष्ठ:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम ज्येष्ठ रखा गया है।

4. आषाढ़:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों में होता है, इसलिए इस महीने का नाम आषाढ़ रखा गया है।

5. श्रावण:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम श्रावण रखा गया है।

6. भाद्रपद:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा भाद्रपद नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम भाद्रपद रखा गया है।

7. अश्विन:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम अश्विन रखा गया है।

8. कार्तिक:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम कार्तिक रखा गया है।

9. मार्गशीर्ष:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम मार्गशीर्ष रखा गया है।

10. पौष:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम पौष रखा गया है।

11. माघ:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मघा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम माघ रखा गया है।

12. फाल्गुन:पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों में होता है, इसलिए इस महीने का नाम फाल्गुन रखा गया है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिंदी महीनों का यह नामकरण चंद्र चक्र पर आधारित है, जो सौर चक्र से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है। इसीलिए हर 3 वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, हिन्दू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार माह के दो भाग होते हैं। एक महीने में 30 दिन होते हैं, जिन्हें दो भागों में बांटा जाता है – कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। प्रत्येक पक्ष 15 दिनों का होता है।

कृष्ण पक्ष : पूर्णिमा के अगले दिन, प्रतिपदा से अमावस्या के बीच की तिथियों (15 दिनों) को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। इस अवधी में चंद्रमा का आकार घटता जाता है, और रातें अंधेरी होती जाती हैं।

शुक्ल पक्ष : अमावस्या के अगले दिन, प्रतिपदा से पूर्णिमा के बीच की तिथियों (15 दिनों) को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। इस अवधी में  चंद्रमा का आकार बढ़ता जाता है, और रातें चांदनी होती जाती हैं।

दूसरे शब्दों में, कृष्ण पक्ष में चंद्रमा घटता है और शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है। दोनों पक्षों के 15-15 दिन मिलकर एक चंद्र मास बनाते हैं।

विक्रम संवत, जिसे विक्रमी संवत भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित एक पारंपरिक हिंदू पंचांग (कैलेंडर) है। यह भारत के कई राज्यों में पारंपरिक पंचांग के रूप में उपयोग किया जाता है और नेपाल में भी सरकारी कैलेंडर के रूप में उपयोग होता है। विक्रम संवत, चंद्र मास और सौर नक्षत्र वर्ष पर आधारित है। 

विक्रम संवत की मुख्य बातें:

  • आधार:
  • चंद्र मास और सौर नक्षत्र वर्ष।
  • उपयोग:भारत के कई राज्यों में पारंपरिक पंचांग, नेपाल का सरकारी कैलेंडर।
  • महत्व:हिंदू त्योहारों और शुभ मुहूर्त की गणना के लिए महत्वपूर्ण।
  • वर्ष की शुरुआत:गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से और उत्तरी भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से।

विक्रम संवत और ईस्वी संवत में अंतर:

विक्रम संवत, ईस्वी संवत (ग्रेगोरियन कैलेंडर) से 57 वर्ष आगे है।

यदि आज 2025 ईस्वी है, तो विक्रम संवत 2025 + 57 = 2082 होगा।

शक संवत भारत का एक प्राचीन पंचांग है, जो 78 ईस्वी से प्रारंभ होता है। इसे भारत सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है और इसे राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में भी जाना जाता है। शक संवत, विक्रम संवत से 135 वर्ष बाद और ग्रेगोरियन कैलेंडर से 78 वर्ष पीछे है।

शक संवत के बारे में कुछ मुख्य बातें:

  • शुरुआत:शक संवत की शुरुआत 78 ईस्वी में हुई थी।
  • राष्ट्रीय कैलेंडर:इसे भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में अपनाया गया है।
  • सौर कैलेंडर:यह एक सौर कैलेंडर है, जिसका अर्थ है कि यह सूर्य की गति पर आधारित है।
  • महीने:शक संवत में 12 महीने होते हैं, जो चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन हैं।
  • पहला महीना:शक संवत का पहला महीना चैत्र है, जो 22 मार्च से शुरू होता है (लीप वर्ष में 21 मार्च)।

अंतर:

शक संवत और विक्रम संवत के बीच लगभग 135 वर्षो का अंतर है।

1. चैत्र नवरात्रि (9 दिन):यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है और नौ दिनों तक मनाया जाता है।

2.  रामनवमी:भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

3. हनुमान जयंती:भगवान हनुमान के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है

4. गुड़ी पड़वा:महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला नववर्ष का त्योहार, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।

5. पापमोचिनी एकादशी:एक महत्वपूर्ण एकादशी व्रत।

6. रंग पंचमी:होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है, जिसमें रंग और पानी से खेला जाता है।

7. शीतला अष्टमी:देवी शीतला को समर्पित एक त्योहार, जो चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है।

8. चैत्र पूर्णिमा:चैत्र महीने का पूर्णिमा का दिन, जिसे हनुमान जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

9. कामदा एकादशी:

10. महावीर जयंती:

11. वैशाखी:

13. संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत: 

14. कालाष्टमी: 

15. वरुथिनी एकादशी: 

16. प्रदोष व्रत: 

17. मासिक शिवरात्रि: 

18. वैशाख अमावस्या: 

19. परशुराम जयंती: 

20. अक्षय तृतीया: 

21. वरद चतुर्थी: 

22. गंगा सप्तमी: 

23. बगलामुखी जयंती, दुर्गाष्टमी व्रत: 

24. सीता नवमी: 

25. मोहिनी एकादशी: 

26. प्रदोष व्रत: 

27. नरसिंह जयंती: 

28. वैशाख पूर्णिमा व्रत, बुद्ध पूर्णिमा:

29. जानकी नवमी:

30. बड़ा मंगल/बुढ़वा मंगल:ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले सभी मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है, इस दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है

31. अपरा एकादशी:यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है

32. शनि जयंती:ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है, इस दिन शनिदेव की पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है

33. वट सावित्री व्रत:यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या या पूर्णिमा को मनाया जाता है, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं

34. गंगा दशहरा:ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है, इस दिन गंगा नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है

35. निर्जला एकादशी:ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी मनाई जाती है, इस दिन बिना जल पिए व्रत रखा जाता है

36. वट पूर्णिमा:यह व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है, खासकर महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में

37. महेश नवमी:यह त्योहार भगवान महेश (शिव) को समर्पित है

38. गायत्री जयंती:यह त्योहार देवी गायत्री को समर्पित है

39. कबीर जयंती:

40. नारद जयंती:

41. शीतलाष्टमी:

42. महाराणा प्रताप जयंती:

43. निर्जला एकादशी:

ज्येष्ठ महीना गर्मी का महीना होता है और इस महीने में जल का दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है. इस महीने में हनुमान जी और भगवान सूर्य की पूजा का भी विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ महीने में दान-पुण्य करने से विशेष फल मिलता है

44. जगन्नाथ रथयात्रा:यह त्योहार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा के रूप में मनाया जाता है।

45. देवशयनी एकादशी:इसे आषाढ़ी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास का आरंभ माना जाता है।

46. गुरु पूर्णिमा:यह दिन गुरुओं के सम्मान और पूजा के लिए समर्पित है।

47. गुप्त नवरात्रि (9 दिन):आषाढ़ महीने में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है, जिसमें दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।

48. आषाढ़ अमावस्या:यह दिन पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

49. योगिनी एकादशी:यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है।

50. प्रदोष व्रत:यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है।

51. मासिक शिवरात्रि:यह व्रत भी भगवान शिव को समर्पित है।

52. मिथुन संक्रांति:सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश करने पर यह संक्रांति मनाई जाती है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आषाढ़ महीने में देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है, जिसमें विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं

53. सावन सोमवार (4/5 दिन):श्रावण के हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है। भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ाते हैं।

54. मंगला गौरी व्रत:सावन के हर मंगलवार को माता पार्वती (गौरी) की पूजा की जाती है।

55. हरियाली तीज:यह त्योहार श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

56. नाग पंचमी:यह त्योहार श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है।

57. रक्षाबंधन:यह त्योहार श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती हैं।

58. कामिका एकादशी:यह व्रत श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी को आता है।

59. प्रदोष व्रत:यह व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है, और इस महीने में भक्त उनकी कृपा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के व्रत और अनुष्ठान करते हैं

60. जन्माष्टमी:भगवान कृष्ण का जन्मदिन, जो भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

61. कजरी तीज:यह त्योहार विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है।

62. हरतालिका तीज:यह त्योहार भी विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का प्रतीक है।

63. गणेश चतुर्थी:भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

64. अनंत चतुर्दशी:यह त्योहार भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए मनाया जाता है।

65. राधाष्टमी:भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जो राधा रानी के जन्मदिन का प्रतीक है।

66. ऋषि पंचमी:यह त्योहार सप्त ऋषियों की पूजा के लिए मनाया जाता है।

67. अजा एकादशी:यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है।

68. स्वन्त्रता दिवस:

69. जीवपुत्रिका व्रत:

भाद्रपद का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

70. पितृ पक्ष (महालया 15 दिन):आश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों के श्राद्ध और तर्पण का समय होता है। 

71. शारदीय नवरात्रि (9 दिन):आश्विन शुक्ल पक्ष में मनाई जाने वाली 9 दिनों की नवरात्रि, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। 

72. दशहरा:नवरात्रि के अंतिम दिन, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, मनाया जाता है। 

73. शरद पूर्णिमा:आश्विन पूर्णिमा को मनाई जाती है, जिसे कोजागर पूर्णिमा भी कहा जाता है। 

74. जितिया व्रत:

  • आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत मनाया जाता है।
  • 75. इंदिरा एकादशी:आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी मनाई जाती है।
  • 76. प्रदोष व्रत:आश्विन महीने में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों में प्रदोष व्रत भी आते हैं।
  • 77. सर्व पितृ अमावस्या:आश्विन अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जब सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है

78. पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जयंती

79. माता भगवती देवी शर्मा जयंती

80. वाल्मीकि जयंती

81. धनतेरस:यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी, धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। 

82. नरक चतुर्दशी:इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। 

83. दीपावली:यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और कुबेर की पूजा की जाती है। 

84. गोवर्धन पूजा (अन्नकूट):यह त्योहार दीपावली के अगले दिन कार्तिक मास की प्रतिपदा को मनाया जाता है। 

85. भाई दूज:यह त्योहार दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक करती हैं। 

86. छठ पूजा:यह चार दिवसीय त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और सप्तमी को समाप्त होता है।

87. देवउठनी एकादशी:यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु नींद से जागते हैं और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। 

88. कार्तिक पूर्णिमा:यह त्योहार कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है।

89. अहोई अष्टमी

90. तुलसी विवाह

91. देव प्रबोधनी एकादशी

92. गुरुनानक जयंती

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • कार्तिक महीने में पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है।
  • इस महीने में भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा करना शुभ माना जाता है। 
  • कार्तिक मास में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) से परहेज करना चाहिए। 
  • इस महीने में जमीन पर सोना और इंद्रियों पर संयम रखना लाभकारी माना जाता है।

93. कालभैरव जयंती: यह त्योहार भगवान कालभैरव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.

94. उत्पन्ना एकादशी: यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन व्रत रखने से विशेष फल मिलता है.

95. विवाह पंचमी: यह त्योहार भगवान राम और देवी सीता के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

96. गीता जयंती: इस दिन भगवद्गीता का पाठ करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था.

97. मोक्षदा एकादशी: यह एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

98. दत्तात्रेय जयंती: यह त्योहार भगवान दत्तात्रेय के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.

99. अन्नपूर्णा जयंती: यह त्योहार देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है, जो भोजन और पोषण की देवी हैं।

100. नदी स्नान:

इस महीने में किसी पवित्र नदी में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है।

101. दान-पुण्य:

102. सफल एकादशी:

o सात्विक भोजन: इस महीने में सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक चीजों से परहेज करना चाहिए।
o भगवान कृष्ण की पूजा: इस महीने में भगवान कृष्ण की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
o गीता का पाठ: इस महीने में गीता का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 

103. विवेकानंद जयंती (युवा दिवस)12 जनवरी को मनाई जाती है विवेकानंदजी का जन्मदिन और युवा दिवस।

104. . लोहड़ी: यह त्योहार पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाया जाता है, और यह सर्दियों के मौसम के अंत का प्रतीक है। इस दिन अलाव जलाकर, लोकगीत गाकर और नृत्य करके खुशियां मनाई जाती हैं।

105. मकर संक्रांति: यह त्योहार 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन खिचड़ी दान करने और पतंग उड़ाने का विशेष महत्व है। या पोंगल: 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है, यह मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है।

106. पौष पूर्णिमा:
यह पूर्णिमा पौष महीने के शुक्ल पक्ष में आती है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व है।

107. सफला एकादशी:

यह एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 

108. सोमवती अमावस्या:
यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और पितरों को तर्पण करने का महत्व है।

109. गुरु गोबिंद सिंह जयंती:
यह सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्मदिन है और इस दिन गुरुद्वारे में विशेष प्रार्थनाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

110. पुत्रदा एकादशी, 

111. मासिक शिवरात्रि, 

112. प्रदोष व्रत, 

113. मासिक दुर्गाष्टमी

114. पौष पुत्रदा एकादशी: 

115. मकर संक्रांति: 14 जनवरी को मनाई जाती है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं।

116. सकट चौथ: 17 जनवरी को मनाई जाती है, यह भगवान गणेश को समर्पित एक व्रत है।

117. षटतिला एकादशी: 20 जनवरी को मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। 

118. श्री रामलला प्रतिष्ठा दिवस: 22 जनवरी को मनाया जाता है, 2024 में श्री रामजन्म भूमि का जीर्णोद्धार किया गया 500 वर्षों के बाद।

119. श्री सुभाषचन्द्र बोस जयंती: 23 जनवरी को मनाया जाता है, भारत को आज़ादी सिर्फ इनके कारण मिली।

120. गड़तंत्र दिवस: 26 जनवरी को मनाया जाता है, यह भारत का राष्ट्रीय पर्व है। 

121. मौनी अमावस्या:
29 जनवरी को मनाई जाती है, इस दिन मौन व्रत रखने और गंगा स्नान का महत्व है।

122. रविदास जयंती

123. वसंत पंचमी:12 फरवरी को मनाई जाती है, यह विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है।

124. माघ पूर्णिमा: 12 फरवरी को मनाई जाती है, इस दिन गंगा स्नान और दान का महत्व है।

125. माघ बिहू: 

126. सकट चतुर्थी: 

127. प्रदोष व्रत: 

128. माघ अमावस्या: 

129. गुरु गोबिंद सिंह जयंती: 

130. सूर्य सप्तमी

  • गंगा स्नान:माघ महीने में गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
  • दान-पुण्य:इस महीने में गरीबों को दान करना और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है।
  • भगवान विष्णु की पूजा:माघ महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • पवित्रता:माघ महीने में मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने की सलाह दी जाती है। 

131. रामकृष्ण परमहंस जयंती

132. शिवरात्रि

133. होलिका दहन

134. धूलिवंदन (होली):यह रंगों का त्योहार है और फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है।

135. महाशिवरात्रि:यह भगवान शिव की पूजा का पर्व है, जो फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।

136. फुलेरा दूज:यह त्योहार भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है और फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दूज तिथि को मनाया जाता है।

137. फाल्गुन पूर्णिमा:यह पूर्णिमा तिथि है, जिस दिन होलिका दहन होता है और होली का त्योहार मनाया जाता है।

138. फाल्गुन अमावस्या:यह फाल्गुन महीने का अंतिम दिन होता है।

139. आमलकी एकादशी:यह एकादशी तिथि है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।

140. विजया एकादशी:यह फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है।

141. संकष्टी चतुर्थी:

142. विनायक चतुर्थी:

143. प्रदोष:

144. मासिक दुर्गाष्टमी:

खरमास एक ऐसा समय है जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, और इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करना माना जाता है। यह अवधि आमतौर पर साल में दो बार आती है, एक बार दिसंबर-जनवरी में और दूसरी बार मार्च-अप्रैल में।

खरमास के दौरान, कुछ धार्मिक कार्यों को करना शुभ माना जाता है, जैसे कि सूर्य देव की पूजा करना, दान-पुण्य करना, और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना।

खरमास के दौरान, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, और अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यह माना जाता है कि खरमास में सूर्य की गति धीमी हो जाती है, जिसके कारण शुभ कार्यों के परिणाम में बाधा आ सकती है।

खरमास का समापन मकर संक्रांति के साथ होता है, जिसके बाद शुभ कार्यों को फिर से शुरू किया जा सकता है।

मलमास, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, एक अतिरिक्त महीना है जो हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार जोड़ा जाता है। यह सौर और चंद्र वर्षों के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए किया जाता है। 

क्यों जोड़ा जाता है?

हिंदू कैलेंडर चंद्र आधारित है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। इन दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। हर तीन साल में यह अंतर लगभग 33 दिनों का हो जाता है, जिसे एक अतिरिक्त महीने के रूप में समायोजित किया जाता है। 

इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?

इसे अधिक मास (अतिरिक्त महीना) कहा जाता है क्योंकि यह एक अतिरिक्त महीना है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि इस महीने को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। 

शुभ कार्यों पर रोक:

मलमास में कुछ शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि नहीं किए जाते हैं। 

धार्मिक महत्व:

मलमास को आध्यात्मिक महत्व का समय माना जाता है। इस महीने में भगवान की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल मिलता है।

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