दशहरा विजयदशमी और शस्त्र पूजा
विजयादशमी और शस्त्र पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ
भीतर के रावण को जो, आग स्वयं लगायेंगे।
सही मायनों में वे ही, दशहरा मनायेंगे।।
न चापि त्रिषु लोकेषु राजन्विद्येत कश्चन।
राघवस्य व्यलीकं यः कृत्वा सुखमवाप्नुयात्।। 5.51.20

यह श्लोक रामचरितमानस के युद्धकाण्ड का है, जिसमें हनुमान रावण से कहते हैं कि इन तीनों लोकों में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जो भगवान राम (राघव) को प्रसन्न करके/उनके विपरीत होकर (व्यलीकं) सुखी हो सके। इसका अर्थ है कि राम को अप्रसन्न करने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता।
रावण क्या है ?
कायरता, सही के लिये आवाज़ ना उठाना, गलत को देखना और उसका साथ देना, सिर्फ अपना और अपने परिवार के बारे में सोचना, नशा, दहेज, चोरी, बेईमानी, घूस, बड़ो की इज़्ज़त ना करना, कमजोरो को सताना, देश विरोधी काम करना, सनातन धर्म की रक्षा ना करना।
रावण को कैसे मारे?
ज्ञान, बुद्धि, संस्कार, संस्कृति, बहादुरी, अध्यात्म, ताकत, सुसंस्कारवान बनें, रक्षा करें, देश से लगाव करे, धर्म को पढ़े और अपनाये।
शस्त्र पूजा
शस्त्र पूजा विजय दशमी (दशहरा) के दिन की जाती है, जो आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि होती है। इस दिन शस्त्रों की पूजा करके युद्ध और संघर्ष में विजय प्राप्त करने और शक्ति व सुरक्षा के लिए देवताओं का आशीर्वाद मांगा जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसके द्वारा राजा-महाराजा युद्ध पर जाने से पहले अपने शस्त्रों की पूजा करते थे।
शस्त्र पूजा का महत्व:
विजय की कामना:
यह पूजा जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करने की कामना के साथ की जाती है।
शक्ति और सुरक्षा:
शस्त्र देवताओं से सुरक्षा, शक्ति और विजय की कामना के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है।
पापों का नाश:
दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजा करने से जीवन की हर प्रकार की दरिद्रता, शोक और भय का नाश होता है।
पूजा विधि:
1. सबसे पहले सभी शस्त्रों को इकट्ठा किया जाता है और उन पर गंगाजल छिड़का जाता है।
2. शस्त्रों पर हल्दी व कुमकुम का तिलक लगाकर फूल अर्पित किए जाते हैं।
3. इस पूजा में शमी के पत्तों का भी बहुत महत्व होता है और उन्हें शस्त्रों पर चढ़ाकर पूजा की जाती है।
4. पूजा के दौरान शस्त्र देवता से सुरक्षा, शक्ति और विजय की कामना के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है।
